विधानसभा अध्यक्ष की सीट पर प्रियंका गांधी का प्रोजेक्ट:मतदान केंद्रों पर बनेंगे बूथ रक्षक, कम मार्जिन से हारी सीटों के लिए नया प्लान

चुनावों में लगातार हार के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी जहां वोट चोरी के खिलाफ अभियान चलाकर बीजेपी और चुनाव आयोग को घेर रहे हैं, वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी देश की 5 विधानसभा सीटों पर ‘हर बूथ मजबूत’ कार्यक्रम शुरू करने जा रहीं हैं। मप्र, उप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा की एक-एक विधानसभा सीटों को इस प्रोग्राम के लिए चुना गया है। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो प्रियंका गांधी ने ‘हर बूथ मजबूत’ कार्यक्रम के लिए मुरैना जिले की दिमनी विधानसभा सीट को चुना है। दिमनी से बीजेपी के कद्दावर नेता और मप्र के विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर विधायक हैं। राजस्थान के बाड़मेर जिले की सिवाना से कांग्रेस के पूर्व विधायक और राजस्थान राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष गोपाराम मेघवाल को प्रियंका गांधी ने दिमनी की जिम्मेदारी सौंपी है। देश की इन 5 विधानसभा सीटों में चलेगा प्रोजेक्ट कैसे हुआ विधानसभा सीटों का चयन
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अलग-अलग राज्यों की 5 ऐसी विधानसभा सीटें इस कार्यक्रम के लिए चुनी हैं जहां पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस कम अंतर से चुनाव हारी है। इस कार्यक्रम के लिए 25 ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां कांग्रेस कैंडिडेट्स की हार का अंतर 33 से 35 हजार के बीच रहा है। वहीं 30 सीटें ऐसी हैं जहां हार का अंतर 50 से 55 हजार के बीच रहा है। 20-20 बूथों के कलस्टर बनाए जाएंगे
इस कार्यक्रम के तहत चुने गए विधानसभा क्षेत्र में 20-20 बूथों के कलस्टर बनाए जाएंगे। हर कलस्टर बूथ रक्षक नियुक्त किया जाएगा। बूथ रक्षक को प्रियंका गांधी की टीम ट्रेनिंग देंगी। बूथ रक्षक अपने कलस्टर की बूथ समितियों के सदस्यों को गाइड करेगा। बूथ रक्षक ये सुनिश्चित करेंगे कि किस मतदान केन्द्र पर कितने मतदाताओं के नाम गलत जुडे़ हुए हैं। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव की वोटर लिस्ट में चुनाव के दो महीने पहले काटे, जोड़े गए नामों का एनालिसिस करेंगे। बूथ रक्षक बीएलओ के साथ ये सुनिश्चित करेंगे कि एक भी सही वोटर मतदाता सूची से न छूटे और एक भी गलत नाम वोटर लिस्ट में शामिल न रहे। एमपी में दिमनी सीट को ही क्यों चुना?
इस प्रोजेक्ट को प्रियंका गांधी खुद लीड कर रहीं हैं। ऐसे में टीम के लिए दिल्ली से मुरैना आना ज्यादा आसान हो सकता है। मप्र में 2003 से भाजपा की सरकार होने के बावजूद चंबल में कांग्रेस मजबूत स्थिति में रही है। मुरैना-श्योपुर लोकसभा सीट में कुल 8 विधानसभा आती हैं, जिनमें से पांच विधानसभाओं श्योपुर, विजयपुर, जौरा, मुरैना और अंबाह में कांग्रेस के विधायक हैं, वहीं भाजपा के पाले में केवल तीन विधानसभा सबलगढ़, सुमावली और दिमनी सीटें हैं। मुरैना लोकसभा चुनाव परिणाम पर भी नजर
मुरैना लोकसभा सीट पर 2024 में कांग्रेस कैंडिडेट सत्यपाल सिंह नीटू सिकरवार 52, 530 वोटों के अंतर से चुनाव हारे थे। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के करीबी बीजेपी प्रत्याशी शिवमंगल सिंह तोमर मुरैना से सांसद बने थे। कांग्रेस विधायक ने थाम लिया था बीजेपी का दामन
बीते लोकसभा चुनाव के दौरान मुरैना-श्योपुर संसदीय सीट पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर की प्रतिष्ठा दांव पर थी। इसी चुनाव के दौरान विजयपुर से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने बीजेपी जॉइन कर ली थी। 2023 में रावत कांग्रेस के टिकट पर विजयपुर से करीब 18 हजार वोटों से जीते थे। लेकिन, लोकसभा चुनाव में वे जब रावत बीजेपी के साथ आ गए। तो बीजेपी प्रत्याशी शिवमंगल सिंह तोमर को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से 32516 वोटों की बढ़त मिली। लोकसभा चुनाव में सबलगढ़ में कांग्रेस कैंडिडेट नीटू सिकरवार को सबसे बड़ी 14010 वोटों की बढ़त मिली थी। मुरैना विधानसभा में कांग्रेस को महज 1411 वोट और जौरा में 11112 वोट की बढ़त मिली थी। सुमावली विधानसभा में 15891 वोटों से बीजेपी को लीड मिली थी। दिमनी विधानसभा में 16024 वोटों से बीजेपी उम्मीदवार शिवमंगल सिंह तोमर को लीड मिली थी। अनारक्षित हुई दिमनी सीट से तोमर जीते
2008 में अनारक्षित हुई दिमनी विधानसभा सीट से शिवमंगल सिंह तोमर विधायक बने थे। इसके बाद 2013 में बसपा के बलवीर सिंह दंडोतिया चुनाव जीते। 2018 में कांग्रेस के गिर्राज दंडोतिया चुनाव जीते। मार्च 2020 में गिर्राज ने सिंधिया के साथ बीजेपी जॉइन कर ली। इसके बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रविंद्र सिंह तोमर ने जीत दर्ज की। 2023 के विधानसभा चुनाव में नरेन्द्र सिंह तोमर विधायक बने।

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