बीना जिले से विधायक निर्मला सप्रे का दल बदल मुद्दा याचिका के जरिए हाईकोर्ट की मुख्य खंडपीठ जबलपुर में दाखिल किया गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 2023 में कांग्रेस के टिकट पर सागर जिले से विधायक बनीं निर्मला सप्रे बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया। मामले पर मंगलवार को सुनवाई होना था, जिस पर तकनीकी गलती के कारण दूसरी बेंच पर लग गया। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को निर्देश दिए है कि केस को उचित बेंच पर लगाया जाए। हाईकोर्ट ने मामले की अगली 8 अक्टूबर को तय की है। मध्यप्रदेश विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है, कि 2023 में कांग्रेस के टिकट पर सागर जिले से विधायक बनीं निर्मला सप्रे बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया। उमंग सिंघार ने अपनी याचिका में चुनौती देते हुए बताया था कि यह संविधान की भावना के खिलाफ है। इसलिए उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। हालांकि, इससे पहले कांग्रेस ने इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की थी, लेकिन वह खारिज हो गई थी। पूर्व की याचिका इसलिए खारिज इससे पहले यही दल-बदल मामला इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ में पहुंचा था। वहां जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में विचारणीय नहीं है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता इस विषय को जबलपुर मुख्य पीठ के समक्ष रख सकते हैं। इसी आधार पर कांग्रेस ने अब जबलपुर हाईकोर्ट में नई रिट याचिका दाखिल कर दी है। 6 सितंबर को रजिस्टर्ड यह याचिका अभी रजिस्ट्रार तक पहुंची है और जल्द ही इसके सुनवाई सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। कई नेताओं को बनाया गया है प्रतिवादी इस याचिका में विधायक निर्मला सप्रे के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और राज्य सरकार को भी प्रतिवादी बनाया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजे जाने के बावजूद 90 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते कोर्ट की शरण लेना पड़ी।
विधायक सप्रे के खिलाफ याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई:तकनीकी गलती से मामला दूसरी बेंच पर पहुंचा; सीजे ने रजिस्ट्रार को लिस्टिंग के निर्देश दिए
