शारदीय नवरात्रि में मध्यप्रदेश के देवी धामों में भक्तों की भीड़ लग रही है। आज दैनिक भास्कर के साथ कीजिए उन प्रसिद्ध देवी मंदिरों के दर्शन, जो केवल आस्था ही नहीं बल्कि परंपराओं और मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध हैं। आगर-मालवा का मां बगलामुखी मंदिर देश के सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली देवी धामों में गिना जाता है। यहां मां जाग्रत रूप में विराजती हैं। यह तंत्र साधना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। उज्जैन के भूखी माता मंदिर में प्रतिदिन नरबलि दी जाती थी और माता उस रक्तपान से संतुष्ट होती थीं। गुना जिले के बजरंगगढ़ की ऊंची पहाड़ी पर स्थित बीस भुजा देवी मंदिर का प्राचीन इतिहास है। वहीं, भोपाल के पास रायसेन रोड स्थित गुदावल गांव का कंकाली देवी मंदिर लगभग 300 साल पुराना है, जो अद्भुत विशेषता के लिए जाना जाता है। आइए, एमपी के इन 4 मंदिरों के करते हैं दर्शन बगलामुखी, नलखेड़ा आगर-मालवा में लखुंदर नदी किनारे स्थित है बगलामुखी मंदिर। माना जाता है कि यहां मां जागृत रूप में विराजती हैं। तंत्र साधकों के लिए यह सबसे बड़ा स्थान है। मंदिर जितना अनोखा है, उतना ही रहस्यमयी भी है। मान्यता के अनुसार यहां तांत्रिक और मिर्च अनुष्ठान से कोर्ट केस में जीत, शत्रुओं का नाश और संतान की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि महाभारत काल में पाण्डवों को यहीं से विजयश्री का वरदान प्राप्त हुआ था। यहां माता तीन रूप में विराजित हैं। दाएं महालक्ष्मी, बाएं सरस्वती और बीच में बगलामुखी के रूप में दर्शन देती हैं। मंदिर का गर्भगृह 3 करोड़ रुपए से अधिक के स्वर्ण, 65 लाख रुपए की चांदी और आभूषणों से दमक रहा है। मंदिर के ठीक सामने 80 फीट ऊंची दीपमाला स्थित है। भूखी माता, उज्जैन उज्जैन स्थित भूखी माता का मंदिर शिप्रा नदी के किनारे पर है। यहां भूखी माता और धूमावती माता एक ही स्थान पर विराजित हैं। इन्हें बहनें भी माना जाता है। मान्यता है कि यहां प्राचीन समय में हर दिन एक युवक की बलि दी जाती थी। माता उसका रक्त पीती थीं, इसी कारण उन्हें भूखी माता कहा गया। अब इस मंदिर में रोजाना माता को मदिरा का भोग लगाया जाता है, ठीक उसी तरह जैसे काल भैरव मंदिर में होता है। श्रद्धालु स्वयं मदिरा लाकर चढ़ाते हैं और अगर कोई श्रद्धालु नहीं लाता, तो मंदिर की ओर से यह भोग चढ़ाया जाता है। यहां पर अब भी पशु बलि की परंपरा जारी है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु बकरा या मुर्गा माता को चढ़ाते हैं। बीस भुजा देवी, गुना गुना जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर, बजरंगगढ़ की ऊंची पहाड़ी पर मां बीस भुजा देवी विराजमान हैं। मान्यता है कि यहां मां भक्तों को तीन रूपों में दर्शन देती हैं। सुबह कन्या, दोपहर में युवा और शाम को प्रौढ़ (वृद्ध)। यह 5,500 साल पुराना मंदिर है, जहां कर्ण ने 9 साल तपस्या की थी। यहां देवी की 20 भुजाओं वाली प्रतिमा है, जिसे हर कोई गिन नहीं पाता। पुजारी महेश शर्मा बताते हैं- मां भगवती ने स्वयं कहा था कि वे अपने प्रिय भक्त को बीस हाथों के साथ दर्शन देंगी, इसलिए संसार में उनका नाम ‘बीस भुजा’ प्रसिद्ध हुआ। अंगराज कर्ण को उन्होंने बीस हाथों के साथ दर्शन दिए, जिसके बाद कर्ण ने ‘बीसम भुजाम सुंदरी’ कहकर उनकी स्तुति की। तभी से मां का नाम बीस भुजा पड़ा। आमतौर पर 18 भुजाओं वाली माता के मंदिर होते हैं, लेकिन यह शायद इकलौता मंदिर है, जहां मां बीस भुजाओं के साथ विराजमान हैं। कंकाली देवी मंदिर, भोपाल भोपाल के पास रायसेन रोड पर गुदावल गांव स्थित मां कंकाली देवी मंदिर मध्यप्रदेश का एक अद्भुत और चमत्कारी शक्तिपीठ है। लगभग 300 साल पुराने इस मंदिर में विराजमान माता की प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मूर्ति का सिर 45 डिग्री झुका हुआ रहता है। शारदीय नवरात्रि में विशेष हवन के समय कुछ क्षणों के लिए यह अपने आप सीधा हो जाता है। भक्त मानते हैं कि जो इस अनोखे चमत्कार के साक्षी बनते हैं, उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। मां कंकाली देवी के मंदिर की स्थापना सन 1731 में हरलाल मीणा ने कराई थी। मंदिर ट्रस्ट उपाध्यक्ष गुलाब सिंह पटेल बताते हैं कि हरलाल मीणा को माता ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। स्वप्नादेश मिलने पर उन्होंने साथियों के साथ यहां खुदाई की। जिसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश, काल भैरव सहित कई प्राचीन मूर्तियां मिलीं। खुदाई में निकली मूर्ति ने नरकंकालों की माला पहन रखी थी, इसलिए माता को “कंकाली” नाम दिया गया। उज्जैन की भूखी माता को चढ़ती थी हर दिन नरबलि बगलामुखी के आशीर्वाद से पांडवों को मिली थी जीत बीस भुजा देवी: एक रहस्य, तीन रूप, अनंत महिमा यह खबर भी पढ़ें… देवी मंदिरों में चढ़ाते हैं चप्पल-जूते, शराब और पालना भोपाल में कोलार क्षेत्र की पहाड़ी पर स्थित जीजीबाई माता को भक्त ‘चप्पल वाली माता’ के नाम से जानते हैं। यहां नई चप्पल, जूते या सैंडल चढ़ाने से देवी प्रसन्न होती हैं। इस परंपरा में विदेशों से आए श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। भोपाल के कर्फ्यू वाली माता मंदिर में भक्त नारियल पर अपनी मनोकामना लिखकर अर्पित करते हैं। पढ़ें पूरी खबर
बगलामुखी मंदिर में तंत्र साधना से मिलती है विजय:नवरात्रि में सीधी हो जाती है मां कंकाली की गर्दन; भूखी माता रक्तपान के लिए प्रसिद्ध
