भोपाल में तेज बारिश, सड़कों पर भरा पानी:मानसून की विदाई के बीच 22 जिलों में बरसे बादल, नर्मदापुरम में तवा डैम के 5 गेट खोले

मध्यप्रदेश से विदा हो रहा मानसून कई जिलों में बरस भी रहा है। शनिवार को भोपाल समेत 22 जिलों में पानी गिरा। भोपाल में शनिवार रात को गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। इससे शहर में कई जगह सड़कों पर पानी भर गया। एमपी नगर की मुख्य सड़क पर जगह-जगह जल जमाव की स्थिति बनी। इससे ट्रैफिक जाम के हालात बने। बड़वानी में बारिश के साथ आंधी चली। इससे कई गरबा पंडाल क्षतिग्रस्त हो गए। नर्मदापुरम में तवा डैम लबालब भर गया है। सुबह इसका एक गेट खोला गया था। शाम तक पांच गेट खोलने पड़े। इससे लगभग 60,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। शनिवार को भोपाल, बैतूल, खरगोन, पचमढ़ी, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, श्योपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, मंडला, नरसिंहपुर, छतरपुर के नौगांव, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, उमरिया, बालाघाट, बड़वानी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहा। मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले 3 दिन तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। इंदौर-जबलपुर संभाग में पानी गिरेगा। वहीं, भोपाल में बूंदाबांदी होने के आसार हैं। प्रदेश के 11 जिलों से मानसून ने ली विदाई
प्रदेश के 11 जिलों से मानसून पूरी तरह से विदा हो चुका है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम शामिल हैं। वहीं, उज्जैन, राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून की विदाई हो चुकी है। इस वजह से बारिश का दौर
प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से एक टर्फ गुजर रही है। इस वजह से प्रदेश के निचले हिस्से के जिलों में हल्की बारिश का दौर बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे के दौरान टर्फ और लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) की सक्रियता बढ़ जाएगी। इससे बारिश का दौर चलेगा। इस बीच प्रदेश के कुछ जिलों से मानसून लौट जाएगा। जिन जिलों से लौटा, वहां अच्छी बारिश
प्रदेश के जिन 7 जिलों से शुक्रवार को मानसून लौटा, वहां पर सामान्य से ज्यादा बारिश हो गई है। गुना में सबसे ज्यादा 65.4 इंच पानी गिर चुका है। दतिया में 29.3 इंच के मुकाबले 33.7 इंच, शिवपुरी में 55 इंच, रतलाम में 48.5 इंच, मंदसौर में 33.7 इंच और आगर-मालवा में 39 इंच बारिश हो गई। बता दें कि इस साल मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। बुधवार को जिन जिलों से मानसून की विदाई हुई है, उनमें अमूमन 30 सितंबर तक ऐसा होता है। इस बार 6 दिन पहले ही यहां से मानसून लौट गया है। 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है। अब तक 119 प्रतिशत बारिश हो चुकी
बता दें, प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 44.2 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 37 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.2 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। अब तक 118 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। एमपी में अब तक इतनी बारिश… इंदौर संभाग की तस्वीर सुधरने लगी
इस मानसूनी सीजन में शुरुआत से ही इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं रही। एक समय तो इंदौर में प्रदेश की सबसे कम बारिश हुई थी। ऐसे में अटकलें थीं कि क्या इस बार इंदौर में सामान्य बारिश भी होगी? लेकिन सितंबर महीने में तेज बारिश की वजह से इंदौर में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया। हालांकि, संभाग के बड़वानी, खरगोन और खंडवा की तस्वीर बेहतर नहीं है। दूसरी ओर, उज्जैन में अब भी कोटा पूरा नहीं हुआ है। सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर दूसरे नंबर पर है। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर
एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। 39 में से भोपाल संभाग के 4, इंदौर में 5, जबलपुर के 7, ग्वालियर के 5, सागर के 6, उज्जैन के 4, चंबल के सभी 3, शहडोल के 3 और नर्मदापुरम संभाग के 2 जिले शामिल हैं। गुना में सबसे ज्यादा, खरगोन में सबसे कम बारिश
इस बार गुना में सबसे ज्यादा 65.4 इंच पानी गिर चुका है। रायसेन में 61.1 इंच, मंडला में 61.2 इंच, श्योपुर में 56.6 इंच और अशोकनगर में 56 इंच बारिश हो चुकी है। वहीं, सबसे कम 27.6 इंच बारिश खरगोन में हुई। शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 30 इंच, बड़वानी में 31.3 इंच और धार में 32.8 इंच पानी गिर चुका है। अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड… भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश
भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 4 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इंदौर में सितंबर में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश
इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है, जो साल 1954 में बना था। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिर चुका है। इस महीने इंदौर में औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या इससे अधिक दिनों तक बारिश हो सकती है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में मानसून की वापसी होने लगेगी। ग्वालियर में वर्ष 1990 में गिरा था 25 इंच पानी
ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी, साढ़े 25 इंच बारिश हुई थी। यह सितंबर में मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 24 घंटे में 7 सितंबर 1988 को साढ़े 12 इंच बारिश हुई थी। सितंबर में ग्वालियर की औसत बारिश करीब 6 इंच है, लेकिन पिछले तीन साल से इससे अधिक बारिश हो रही है। ग्वालियर में इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। ऐसे में सितंबर में जितनी भी बारिश होगी, वह बोनस की तरह ही रहेगी। जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड
सितंबर महीने में जबलपुर में भी मानसून जमकर बरसता है। 20 सितंबर 1926 को जबलपुर में 24 घंटे के अंदर साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। वहीं, पूरे महीने में 32 इंच बारिश साल 1926 को हो चुकी है। यहां महीने में औसत 10 दिन बारिश होती है। वहीं, सामान्य बारिश साढ़े 8 इंच है। पिछले 3 साल से सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है। उज्जैन में 1981 में पूरे मानसून का कोटा हो गया था फुल
उज्जैन की सामान्य बारिश 34.81 इंच है, लेकिन वर्ष 1961 में सितंबर की बारिश ने ही पूरे सीजन की बारिश का कोटा फुल कर दिया था। इस महीने 1089 मिमी यानी, करीब 43 इंच पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक साढ़े 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 सितंबर 1961 में ही बना था। सितंबर महीने में उज्जैन की सामान्य बारिश पौने 7 इंच है, लेकिन पिछले दो साल से 12 इंच से ज्यादा बारिश हो रही है। इस महीने औसत 7 दिन बारिश होती है।

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