बेंगलुरु के ट्रैफिक में फंसे एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला:कहा- अंतरिक्ष में यात्रा करना शहर के खराब ट्रैफिक को पार करने से कहीं ज्यादा आसान

एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने बेंगलुरु के खराब ट्रैफिक पर मजाकिया लहजे में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में यात्रा करना शहर के खराब ट्रैफिक को पार करने से कहीं ज्यादा आसान है। शुभांशु शुक्ला गुरुवार को कर्नाटक सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स,आईटी और बीटी विभाग ने फ्यूचराइज थीम पर बेंगलुरु टेक समिट में हिस्सा लेने पहुंचे थे। उन्होंने मराठाहल्ली से बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्जिबिशन सेंटर तक लगभग 34 किमी का सफर तय किया। इसे तय करने में आमतौर पर एक घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है। उन्होंने कहा, ‘मैं बेंगलुरु के दूसरे छोर पर स्थित मराठाहल्ली से यहां पहुंचा हूं। मेरे इस प्रेजेंटेशन में जितना समय लगेगा, उससे तीन गुना समय मैंने सिर्फ सड़क पर बिताया है। उम्मीद है कि आप मेरे कमिटमेंट को समझेंगे।’ प्रियंक खड़गे- सरकार इसे सुधारने की कोशिश करेगी कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने शुभांशु के टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि सरकार शहर में यात्रा समय कम करने और ट्रैफिक प्रबंधन सुधारने की दिशा में काम कर रही है। हम कोशिश करेंगे कि ऐसी दिक्कतें आगे न हों। रिपोर्ट- बेंगलुरु में हर यात्री साल में 117 घंटे जाम में फंसता है जून 2025 में जारी ट्रैफिक पुलिस के हीटमैप के मुताबिक बेंगलुरु में हर दिन करीब 190 किमी तक लंबा जाम लगता है। 2024 के मुकाबले इस साल लोगों का वन-वे सफर 16% बढ़ गया है, यानी अब 19 किमी का रास्ता तय करने में करीब 63 मिनट लग जाते हैं। हर यात्री साल में लगभग 117 घंटे सिर्फ ट्रैफिक में फंसा रहता है। जनवरी से जून 2025 के बीच शहर की सड़कों पर 3 लाख से ज्यादा नई प्राइवेट गाड़ियां जुड़ गईं। सिर्फ जून में ही करीब 50 हजार वाहन रजिस्टर्ड हुए। ट्रांसपोर्ट विभाग के मुताबिक संख्या पूरी नहीं है, क्योंकि बाहर के जिलों और राज्यों की गाड़ियां भी रोज शहर में चलती हैं। ————- ये खबरें भी पढ़ें बेंगलुरु की खस्ताहाल सड़कें, चिदंबरम बोले- दिक्कत पैसों की नहीं, काम की निगरानी की जाए बेंगलुरु की खस्ताहाल सड़कों पर बायोकॉन चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ के ऑफर का कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने स्वागत किया है। चिदंबरम ने एक महीने पहले कहा था, ‘दिक्कत पैसों की नहीं, बल्कि काम के सही तरीके से न होने की है। सरकार को काम के ठेके के अलावा काम की निगरानी के लिए भी किसी कंपनी को ठेका देना चाहिए।’ पूरी खबर पढ़ें

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