जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से विचाराधीन कैदियों के ट्रांसफर वाली याचिका खारिज:कहा- याचिका राजनीतिक फायदे के लिए लगाई; महबूबा बोलीं- गरीब परिवार मिलने तक नहीं जा पाते

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के विचाराधीन कैदियों को दूसरे राज्यों की जेलों से वापस लाने की उनकी याचिका खारिज होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला हैरान करने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण है। महबूबा ने बताया कि उन्होंने एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर मांग की थी कि जम्मू-कश्मीर के उन कैदियों को, जिन पर अभी दोष सिद्ध नहीं हुआ है, उनके गृह राज्य की जेलों में लाया जाए। लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा था- कोई भी टॉम, डिक या हैरी PIL दायर कर सकता है लेकिन महबूबा एक राजनेता हैं, इसलिए याचिका को राजनीतिक लाभ के लिए दायर किया गया है। इस पर मुफ्ती ने कहा कि कोर्ट ने इस मुद्दे पर खुद संज्ञान क्यों नहीं लिया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट भूल रहा है कि नेता जमीनी हालात को करीब से जानते हैं। मैं नेता होने के नाते जम्मू-कश्मीर के लोगों की परेशानी समझती हूं। गरीब लोग दूर की जेलों में अपने रिश्तेदारों से मिल भी नहीं पाते, तो वे अपना केस कैसे लड़ेंगे। महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया… हाईकोर्ट ने कहा- मुफ्ती न्याय की योद्धा न बनें JKL हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की बेंच ने पीडपी प्रमुख की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मुफ्ती खुद को एक खास वर्ग के लिए न्याय की योद्धा के रूप में पेश कर रही थीं। बेंच ने फैसला सुनाया कि मुफ्ती इस मामले में तीसरे पक्ष की अजनबी थीं क्योंकि प्रभावित कैदियों ने खुद ट्रांसफर के लिए कोर्ट से संपर्क नहीं किया था।

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