मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव तैयार:लोकसभा के 120, राज्यसभा के 60 सांसदों ने दस्तखत किए, कल संसद में पेश किया जा सकता है

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के लिए सांसदों के दस्तखत जुटा लिए हैं। सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव गुरुवार या शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है। एक वरिष्ठ सांसद ने बताया कि हस्ताक्षर जुटाने का काम पूरा हो गया है। अब तक लोकसभा में प्रस्ताव देने के लिए लगभग 120 सांसदों और राज्यसभा में लगभग 60 सांसदों ने इस नोटिस पर दस्तखत किए हैं। नियम के अनुसार 100 सांसदों के दस्तखत जरूरी सूत्रों के मुताबिक यह नोटिस INDIA गठबंधन के सभी दलों के सांसदों ने मिलकर साइन किया है। यह पहली बार है जब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए ऐसा नोटिस दिया जा रहा है। विपक्ष का आरोप-SIR केंद्र सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए विपक्ष का आरोप है कि CEC कई मौकों पर सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने में मदद कर रहे हैं, खासकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नाम की मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया केंद्र की सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहा है। कानून के अनुसार प्रस्ताव मंजूर होने पर ही जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है। जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के अनुसार, अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जांच समिति तभी बनेगी जब दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाएंगे। ——————— ये खबर भी पढ़ें: मुख्य चुनाव आयुक्त बोले- पात्र वोटर का नाम नहीं कटेगा:स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना प्राथमिकता, CEC के लौटते ही CM ममता ने धरना खत्म किया मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार(10 मार्च) को कहा कि किसी भी पात्र वोटर का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिकता है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का मकसद है कि सभी सही वोटर को वोट देने का अधिकार मिले और कोई अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल न हो। पढ़ें पूरी खबर…

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