रिपोर्ट-SIR पर 2 चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई:राहुल ने कहा- वोट चोरी संविधान के खिलाफ, इसमें शामिल किसी को नहीं बख्शेंगे

वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब आयोग के सूत्रों ने सफाई दी है। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर विचार के दौरान सवाल उठा सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या अपनी टिप्पणी दे सकते हैं, लेकिन ऐसी टिप्पणी को औपचारिक असहमति यानी डिसेंट नहीं माना जा सकता। उधर, राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर वोट चोरी को राजद्रोह बताया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR प्रक्रिया पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी प्रक्रियाओं में बदलाव को लेकर सवाल उठाए गए थे। विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियएं राहुल गांधी- मैं इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को साफ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो गलत कर रहे हो। ये राजद्रोह है, देश के खिलाफ है। टाइम आएगा। हम आपको पकड़ेंगे। बचने वाले नहीं हो। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी- मौजूदा घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की महाभियोग प्रक्रिया का आधार बन सकता है। उनका कहना है कि इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बहाल करने में मदद मिलेगी। 2 चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद SIR जारी रखा गया। अगर आयुक्त फैसलों से सहमत नहीं थे, तो प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी। अखिलेश यादव- सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले। ज्ञानेश कुमार को हटाने का पुराना मामला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पहले भी उठ चुकी है। अप्रैल 2026 में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने उनके खिलाफ नोटिस दिया है। इसमें ‘साबित कदाचार’ का आरोप लगाया गया था। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की थी। उन्होंने SIR के दौरान वास्तविक मतदाताओं के प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी। इससे पहले लोकसभा में भी ऐसा प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने प्रस्ताव खारिज कर दिया था। 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई। तीसरा फेज: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।