अमित शाह के बाद अब शिरोमणि अकाली दल (बादल) के प्रधान सुखबीर बादल ने अकाली और भाजपा गठबंधन के संकेत दिए हैं। बादल ने कहा कि अकाली दल क्षेत्रीय पार्टी है। हमारे लिए पंजाब नंबर वन है। सरकार आए न आए, हम पंजाबियों की लड़ाई लड़ते रहेंगे। हमारे लिए 2 पार्टियां पंजाब की सबसे बड़ी दुश्मन हैं, एक कांग्रेस और दूसरी आम आदमी पार्टी। सुखबीर ने कहा- जो भी पार्टी अकाली दल की विचारधारा और प्रोग्राम से सहमत है, हमने गठजोड़ के ऑप्शन खुले रखे हैं। इससे पहले गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा था कि 2027 में पंजाब में NDA की सरकार बनेगी। शिरोमणि अकाली दल का डेलीगेशन गवर्नर गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर पंजाब में बढ़ते ड्रग्स केस और परविंदर झोटा केस को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटाने की मांग करने पहुंचा था। उधर, शाह के बयान पर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने निशाना साधा। मान ने कहा- ये लोग किसी भी डिबेट को फेस नहीं कर सकते। शाह के कहने से सरकार नहीं बनेगी, ये तो जनता के कहने से होगा। अब जानिए अमित शाह ने क्या बयान दिया था… केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पंजाब दौरे के 2 दिन बाद (22 अक्टूबर) को दिल्ली में बड़ा दावा किया था। दिल्ली में यमुना पुनरुद्धार योजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद पंजाब में NDA की सरकार बनेगी। उनके इस बयान से पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ भाजपा के गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई। शाह ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पंजाब के मुख्यमंत्री को काम नहीं करने दे रहे हैं। उन्होंने पंजाब के प्रति अपने दावे को दोहराया, जिसमें कहा कि 2029 तक पंजाब से नशे का कारोबार खत्म कर देंगे। उन्होंने कहा- मेरी बात याद रखना। केजरीवाल कान खोलकर सुन लो। बहाने की राजनीति लंबी नहीं चलती है। रिजल्ट लाने पड़ते हैं। दिल्ली से हार गए। पंजाब में डेरा जमाकर वहां के मुख्यमंत्री को काम नहीं करने देते हो। वहां का काम बिगाड़ रहे हो। मेरी बात ध्यान से सुन लो, अगले चुनाव में AAP का सूपड़ा वहां से साफ होने वाला है। हम 2029 तक पंजाब से नशे के व्यापार को खत्म कर देंगे। 2020 में टूटा था BJP और SAD का गठबंधन पंजाब में BJP और SAD का गठबंधन करीब 24 साल पुराना था। साल 2020 में 3 कृषि कानूनों को लेकर हुए विवाद के कारण दोनों दलों का गठबंधन टूट गया। इसके बाद दोनों दल अलग हो गए। दोनों दल अलग कैसे हुए? गठबंधन टूटने के बाद प्रमुख चुनावों के नतीजे भाजपा और अकाली दल का गठबंधन पंजाब की राजनीति में सिख-हिंदू एकता और सामाजिक संतुलन के रूप में देखा जाता था। अकाली दल का ग्रामीण क्षेत्रों में और भाजपा का शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूत जनाधार था। गठबंधन टूटने के बाद दोनों दलों ने अलग-अलग राजनीतिक रास्ते अपनाए। 1. 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव गठबंधन टूटने के बाद 2022 का विधानसभा चुनाव दोनों दलों के लिए पहली बड़ी चुनावी परीक्षा था। अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ चुनाव लड़ा, जबकि भाजपा ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन किया। 2. 2024 का लोकसभा चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, सीटों के बंटवारे और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बनने के कारण दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा।
सुखबीर बादल ने पंजाब में BJP+अकाली गठबंधन के संकेत दिए:बोले- हमारी दुश्मन AAP और कांग्रेस; CM मान बोले-अमित शाह के कहने से सरकार नहीं बनेगी