गाजा में सीजफायर के बावजूद अंदरूनी संघर्ष जारी है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा में 5 इजराइल समर्थित मिलिशिया ग्रुप (सिविलियन फोर्स) एक्टिव हो गए हैं। यह समूह गाजा के अलग-अलग इलाकों में हमास के सदस्यों को टारगेट करके हत्याएं कर रहे हैं। ये गैंग इजराइल के कब्जे वाले पूर्वी गाजा में काम कर रहे हैं और हमास को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ये अपना शासन बना सके। इजराइल इन्हें खुला समर्थन देता है। इस महीने की शुरुआत में पॉपुलर फोर्सेस के नेता यासर अबू शबाब की हत्या हो गई थी। इजराइल ने इस गुट को सबसे ज्यादा समर्थन दिया था। हमास ने उनकी मौत पर खुशी मनाई, मिठाइयां बांटीं थी। अबू शबाब की मौत के बाद उनकी मिलिशिया कमजोर हुई। अब तक कई लड़ाके सरेंडर कर चुके हैं। इजराइल ने पहले कहा था कि अबू शबाब का गुट रफाह में पुनर्निर्माण की सुरक्षा करेगा। नेतन्याहू ने जून 2025 में माना था कि वे इन समूहों को सक्रिय कर रहे हैं। दावा- हमास के इमाम का मिलिशिया ने कत्ल किया था नवंबर की शुरुआत में दक्षिणी गाजा में दोपहर की नमाज के बाद मस्जिद से बाहर निकलते समय इमाम शेख मोहम्मद अबू मुस्तफा की मोटरसाइकिल सवार हमलावर ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। एक इस्लामिस्ट उग्रवादी समूह ने दावा किया कि यह हत्या एक मिलिशिया समूह ने की है। हमास से जुड़े एक अन्य समूह ने बाद में कहा कि मारा गया इमाम जिहादी था, जिसने गाजा युद्ध के दौरान इजराइली बंधकों को छिपाने में मदद की थी। इस हत्या को हुसाम अल-अस्तल के नेतृत्व वाली इजराइल समर्थित मिलिशिया से जोड़ा गया। मिलिशिया हेड बोला- हमास को हराने की कसम खाई है CNN से फोन पर बातचीत में मिलिशिया हेड अल-अस्तल ने इमाम की हत्या में अपने समूह की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वो इमाम हमास का सदस्य था, उसकी मौत से खुशी हुई। अस्तल का संगठन खुद को काउंटर-टेररिज्म स्ट्राइक फोर्स कहता है और खान यूनिस के इजराइली कब्जे वाले हिस्से में एक गांव पर नियंत्रण का दावा करता है। यह गुट भी इजराइल समर्थित है। अल-अस्तल ने बताया कि उन्होंने हमास को हराने की कसम खाई है। अन्य गुट जैसे पॉपुलर आर्मी और पॉपुलर डिफेंस आर्मी अलग-अलग इलाकों में एक्टिव हैं। ये समूह छोटे हैं इनके पास जन समर्थन कम है, फिर भी हमास पर हमले कर रहे हैं। पश्चिमी गाजा में पकड़ मजबूत कर रहा हमास दो साल के युद्ध के बाद गाजा दो हिस्सों में बंट गया है। पश्चिमी गाजा से इजराइली सेना हट चुकी है। यहां हमास फिर से पकड़ मजबूत कर रहा है। गाजा की ज्यादातर आबादी पश्चिमी गाजा में ही रहती है। पूर्वी हिस्से में इजराइल का कब्जा है। इसे येलो लाइन कहा जाता है, यहां नागरिक कम हैं। गाजा में अस्थिरता बढ़ा रहे मिलिशिया ग्रुप इजराइल की निगरानी में काम कर रहे गुट अब एक नेटवर्क बन गए हैं। यह हमास के हटने पर सत्ता में हिस्सा चाहते हैं। अल-अस्तल ने कहा कि सभी ग्रुप्स में बातचीत है। उन्होंने बताया कि हम सबका एक ही लक्ष्य है, हमास को हराना। इन मिलिशिया ग्रुप के पास हथियार मौजूद हैं। उनके पास दर्जन भर से ज्यादा लड़ाके और गाड़ियां हैं। यह अलग-अलग ठिकानों से काम करते हैं और सोशल मीडिया पर प्रोपगैंडा वाले वीडियो पोस्ट करते हैं। इनमें काले यूनिफॉर्म पहने नकाबपोश लोग राइफलें थामे हमास से गाजा को मुक्त करने के नारे लगाते दिखते हैं। हालांकि ये समूह छोटे हैं, इनके पास जन समर्थन की कमी है, फिर भी वे गाजा में अस्थिरता बढ़ा रहे हैं। युद्धविराम के बाद हमास जिन इलाकों में सत्ता मजबूत कर रहा है, वहां ये मिलिशिया हमले कर हमास को चुनौती दे रहे हैं। हमास ने 8 मिलिशिया मेंबर को गोली मारी थी हमास ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। हमास मिलिशिया को पूरी तरह खत्म करना चाहता है। इससे गाजा में गृहयुद्ध का डर बढ़ गया है। अक्टूबर में एक वायरल वीडियो सामने आया था, जिसमें हमास के नकाबपोश लड़ाकों ने 8 मिलिशिया मेंबर को सड़क पर गोली मार दी थी। हमास ने इन लोगों को इजराइल का जासूस बताया था। वीडियो में 8 लोगों को आंखों पर पट्टी बांधकर बैठाया गया और हमास के लड़ाकों ने उन्हें गोली मार दी। इस दौरान कुछ लोग अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते नजर आए। मिलिशिया ग्रुप को रफाह की सुरक्षा का जिम्मा देगा इजराइल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर ने अक्टूबर में कहा था कि हमास-मुक्त इलाकों में गाजा पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट जल्द शुरू हो सकती है, खासकर रफाह में। रफाह वो क्षेत्र है जहां यासर अबू शबाब की मिलिशिया एक्टिव थी। ये मिलिशिया समूह खुद को गाजा के भविष्य का हिस्सा बताते हैं। इनके नेता कहते हैं कि उनकी भूमिका अहम होगी और वे स्थानीय स्तर पर शासन करने की क्षमता रखते हैं। एक मिलिशिया नेता हुसाम अल-अस्तल ने कहा, “हम निश्चित रूप से ‘डे आफ्टर’ प्लान में शामिल होंगे।” इजराइली सूत्रों ने CNN को बताया कि अबू शबाब की मौत के बावजूद इजराइल इन मिलिशिया का समर्थन जारी रखेगा। अबू शबाब की मिलिशिया को रफाह में पुनर्निर्माण स्थल की सुरक्षा का जिम्मा मिलने वाला था। मिलिशिया को क्या समर्थन देता है इजराइल इजराइल गाजा के अंदर हमास विरोधी छोटे सशस्त्र समूहों (मिलिशिया) को समर्थन देता है। ये समूह मुख्य रूप से पूर्वी गाजा में सक्रिय हैं। ये इजराइली कब्जे वाले इलाके में येलो लाइन के अंदर काम करते हैं। इजराइल क्यों समर्थन देता है इजराइल का मुख्य लक्ष्य हमास को कमजोर करना और गाजा से उसकी सत्ता खत्म करना है। हमास इजराइल का बड़ा दुश्मन है। ये मिलिशिया इजराइल की तरफ से हमास पर हमले करते हैं। युद्धविराम के बाद इजराइल येलो लाइन के पूर्वी हिस्से पर कब्जा रखना चाहता है। ये मिलिशिया वहां स्थानीय शासन जैसे काम करते हैं। इससे इजराइल को इनडायरेक्ट कंट्रोल मिलता है। इजराइली अधिकारियों के मुताबिक यह कदम उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। नेतन्याहू ने पहले कहा था कि “इससे इजराइली सैनिकों की जान बचती है। इजराइल ने गाजा का नया नक्शा बनाया, 50% जमीन पर कब्जा इजराइल ने गाजा की 50% से ज्यादा जमीन पर कब्जा करके उसे अपना इलाका घोषित कर दिया है। इजराइली सेना प्रमुख ऐयाल जमीर ने गाजा सीजफायर प्लान में जिस ‘यलो लाइन’ का जिक्र है, उसे नई बॉर्डर बताया है। यह लाइन अब इजराइल की ‘सुरक्षा सीमा’ की तरह काम करेगी। जमीर ने कहा कि इजराइल अपनी मौजूदा सैन्य पोजिशन नहीं छोड़ेगा। इन पोजिशन्स की वजह से इजराइल गाजा के आधे से ज्यादा हिस्से को कंट्रोल कर रहा है। इसमें गाजा की ज्यादातर खेती की जाने वाली जमीन है। इसके अलावा इसी हिस्से में मिस्र से लगने वाला बॉर्डर क्रॉसिंग (राफा) भी शामिल है। इजराइली सरकार ने आर्मी चीफ जमीर के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की। एक अधिकारी ने इतना कहा कि इजराइली सेना ‘सीजफायर की शर्तों के अनुसार’ तैनात है और आरोप लगाया कि हमास ही सीजफायर तोड़ रहा है। जंग के 2 साल बीते, खंडहर हुआ गाजा हमास के हमले से शुरू हुए गाजा युद्ध के दो साल से ज्यादा हो गए हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में घुसपैठ की और करीब 251 लोगों को बंधक बना लिया। जवाब में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत जंग का ऐलान किया और हमास पर हमले शुरू कर दिए। अब तक 67 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, इनमें 18,430 बच्चे (लगभग 31%) शामिल हैं। गाजा में करीब 39,384 बच्चे सूचि बद्ध हैं जिनके माता या पिता में से कोई एक मारा गया है। वहीं, 17,000 फिलिस्तीनी बच्चे माता-पिता दोनों खो चुके हैं। राहत एजेंसियां कहती हैं- यह अब शहर नहीं, जिंदा बचे लोगों का कैंप मात्र है।
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