असम में BLO को आदेश- वोटरों की गलत फोटो बदलें:बिहार में मिले थे कुत्ते-बिल्ली के फोटो; राहुल बोले- SIR रिफॉर्म नहीं, थोपा हुआ जुल्म

बिहार में वोटर लिस्ट में बिल्लियों–कुत्तों की तस्वीरें मिलने के दावों के बाद निर्वाचन आयोग ने असम के बीएलओ को निर्देश दिया है कि वे मतदाता सूची में नॉन-ह्यूमन, ब्लैक एंड व्हाइट, गलत स्पेसिफिकेशन, और बिना फोटो वाली प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें सही तस्वीरों से बदलें। आयोग ने कहा कि इसके लिए सॉफ्टवेयर-आधारित रिपोर्ट तैयार की जाए और बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करें। असम में विशेष पुनरीक्षण (एसआर) 17 नवंबर से शुरू हो चुका है और अंतिम सूची 10 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि SIR ने देश में अराजकता फैला दी है। 3 हफ्तों में 16 BLO की मौत इससे साबित होती है। नागरिकों को 22 साल पुराने पन्नों में नाम खोजने पर मजबूर किया जा रहा है। हार्ट अटैक, स्ट्रेस, सुसाइड – SIR कोई रिफॉर्म नहीं है, यह थोपा हुआ ज़ुल्म है। इधर, केरल और तमिलनाडु सरकारों के बाद तमिलगा वेत्री कझगम ने तमिलनाडु में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रोसेस को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। फाइनल इलेक्टर लिस्ट 7 फरवरी 2026 को पब्लिश होगी जिन 12 राज्यों और UTs में SIR चल रहा है, उनमें अंडमान और निकोबार आइलैंड्स, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। कुल 51 करोड़ में से 50.47 करोड़ लोगों को फॉर्म बांटे जा चुके हैं। फाइनल इलेक्टर लिस्ट 7 फरवरी, 2026 को पब्लिश होनी है। SIR के 20वें दिन तक बंगाल में लगभग 7.64 करोड़ एन्यूमरेशन फॉर्म बांटे जा चुके हैं। फॉर्म बांटने के मामले में अब तक 7.66 करोड़ वोटरों में से कुल 99.75 प्रतिशत को कवर किया जा चुका है। अब तक कुल 3.77 करोड़ भरे हुए फॉर्म, या 49.26% ऑनलाइन अपलोड किए जा चुके हैं। नोएडा में SIR में लापरवाही पर 67 पर FIR नोएडा में एसआईआर में लापरवाही के आरोप में जिला प्रशासन ने 60 बीएलओ और 7 पर्यवेक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। अधिकारियों पर निर्देशों का पालन न करने और कर्तव्य में लापरवाही के आरोप लगे हैं। बंगाल के राज्यपाल बोले- बीएलओ की मौत पर सीएम के दावे की जांच जरूरी प. बंगाल में एसआईआर में बीएलओ की कथित आत्महत्याओं पर बढ़ते विवाद के बीच राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि सीएम ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए मुद्दों की गहराई से जांच होनी चाहिए। बनर्जी ने एक बीएलओ की कथित ‘सुसाइड नोट’ साझा करते हुए दावा किया था कि अधिकारी ने आयोग को जिम्मेदार ठहराया। तृणमूल का दावा है कि अब तक 30 से अधिक लोग, जिनमें बीएलओ भी शामिल हैं, मारे जा चुके हैं।

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