केरल के मंत्री बोले-संघ परिवार की नफरत का शिकार हुआ:कहा- RSS कार्यकर्ताओं ने CG के मजदूर को मारा, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी बोले- जानकारी नहीं

छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूर को केरल में भीड़ ने 17 दिसंबर को बांग्लादेशी समझकर पीट-पीटकर मार डाला। घटना पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि, उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। न ही उन्होंने इस बारे में अखबारों में पढ़ा है। मामले को समझने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस ने इसे बेहद दुखद घटना बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की है। वहीं, केरल के मंत्री एमबी राजेश ने इस मॉब लिंचिंग की निंदा करते हुए कहा कि, 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 4 RSS परिवार के कार्यकर्ता हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर देश में नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए मंत्री ने कहा कि, वो पूरे देश में संघ परिवार की तरफ से फैलाई गई नफरत की राजनीति का शिकार हुआ है। उसे बांग्लादेशी होने के आरोप में मॉब लिंचिंग का शिकार बनाया गया। एक आरोपी CPIM नेता की हत्या की कोशिश भी शामिल है। एमबी राजेश ने ये बातें न्यूज एजेंसी ANI से कही है। मंत्री को घटना की जानकारी तक नहीं, यह दुर्भाग्यजनक​​​​​​- कांग्रेस​ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि, केरल में छत्तीसगढ़ के मजदूर राम नारायण बघेल को बांग्लादेशी समझकर भीड़ ने पीट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। राम नारायण अपने परिवार की आजीविका के लिए केरल गया था, लेकिन उसी देश में उसकी जान चली गई। कांग्रेस का आरोप है कि देश में फैलाई जा रही नफरत का नतीजा ऐसी घटनाओं के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि, इससे भी दुर्भाग्यजनक यह है कि छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री को इस घटना की जानकारी तक नहीं है। सरकार ने अब तक न तो इस मामले को गंभीरता से लिया है और न ही केरल सरकार से कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस ने मांग की कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले, दोषियों को सजा दी जाए। परिवार के भरण-पोषण के लिए एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, 17 दिसंबर को अट्टापल्लम इलाके में स्थानीय लोगों ने छत्तीसगढ़ के सक्ती निवासी राम नारायण बघेल (31) को चोरी के शक में पकड़ा। उसकी बेरहमी से पिटाई की। पुलिस के मुताबिक, राम नारायण नशे की हालत में थे, लेकिन उनके पास से चोरी का कोई सबूत नहीं मिला था। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर हितेश शंकर ने बताया था कि, शरीर का कोई भी हिस्सा बिना चोट के नहीं था। राम नारायण के शरीर पर 80 से ज्यादा चोटों के निशान थे। सिर में गंभीर चोटों के साथ खून ज्यादा बह गया, जिससे राम नारायण की मौत हो गई। केरल पुलिस के मुताबिक, मजदूर के शरीर पर चोट के बहुत ज्यादा निशान थे। दर्द से उसकी मौत हुई है। मारपीट में मजदूर की छाती से खून भी बह रहा था। शरीर में कई घाव बन गए थे। वालैयार थाने में अपराध क्रमांक 975/2025, धारा 103(1) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया है। परिवार को नहीं दी गई थी मौत की जानकारी राम नारायण के चचेरे भाई शशिकांत बघेल ने बताया था कि परिवार को उनकी मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। पुलिस ने सिर्फ यह कहा कि राम नारायण थाने में हैं और तुरंत पहुंचने को कहा। बाद में पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है। राम नारायण के दो बेटे हैं, जिनकी उम्र 8 और 10 साल है। मृतक के परिजनों ने केरल सरकार या पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक मुआवजे की घोषणा न होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सरकार से तत्काल मुआवजा देने, दोषियों को कड़ी सजा दिलाने और रामनारायण के शव को उसके पैतृक गांव तक पहुंचाने की मांग की है। सोशल एक्टिविस्ट जब्बार बोले- यह मॉब लिंचिंग है वहीं सोशल एक्टिविस्ट जब्बार ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठिया बताकर पीटा गया। यह मॉब लिंचिंग है। पुलिस ने शुरू में बिना ठीक से जांच किए शव को वापस भेजने की कोशिश की। राम नारायण को सांप्रदायिक और नफरत भरी बातें कहकर निशाना बनाया गया। परिवार को सही मुआवजा मिलना चाहिए। मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान इस घटना पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने पलक्कड़ जिला पुलिस प्रमुख से 3 सप्ताह के भीतर डिटेल में रिपोर्ट मांगी है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने 5 आरोपियों को अरेस्ट किया बवाल के बीच वालैयार पुलिस ने 18 दिसंबर को वारदात में शामिल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें मुरली, प्रसाद, अनु, बिपिन और आनंदन शामिल हैं। ये सभी अट्टापल्लम गांव के निवासी हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि राम नारायण का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। ………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… केरल में CG के मजदूर को बांग्लादेशी समझकर पीटा, मौत: पिटाई से 80 से ज्यादा चोटें, डॉक्टर बोले-शरीर का कोई हिस्सा चोट से नहीं बचा छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूर को केरल में भीड़ ने 17 दिसंबर को बांग्लादेशी समझकर पीट-पीटकर मार डाला। भीड़ तब तक मजदूर को पीटती रही, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। उसके शरीर का शायद ही कोई ऐसा हिस्सा था, जिस पर चोट के निशान न हों। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में 80 से ज्यादा चोटों का पता चला है। पढ़ें पूरी खबर

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