बांग्लादेश के चटगांव जिले में हिंदू परिवारों के घर जलाए:आग लगाने से पहले बाहर से दरवाजे बंद किए; दीवार तोड़कर लोगों ने जान बचाई

बांग्लादेश के चटगांव जिले में हिंदू परिवारों के घरों में आगजनी की गई है। सोमवार तड़के करीब 3:45 बजे पश्चिम सुल्तानपुर गांव में दो हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी गई। आरोप है कि हमलावरों ने घरों के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, दो घरों के कुल सात कमरे जलकर खाक हो गए। ये घर सुखा शिल (दुबई में काम करते हैं) और दिहाड़ी मजदूर अनिल शिल के थे। घटना के वक्त घरों में आठ लोग मौजूद थे। रात का खाना खाकर सभी सो गए थे, तभी अचानक आग लग गई। जब परिवार के लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की तो पाया कि दरवाजे बाहर से बंद हैं। जान बचाने के लिए उन्होंने बांस और टीन की दीवारें काटकर किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। आग में पासपोर्ट और घर का सामान जला अनिल शिल के बेटे मिथुन शिल ने बताया कि वह तीन महीने पहले शादी के लिए दुबई से घर आया था। आग में उसका पासपोर्ट, घर का सामान और करीब 80-90 हजार टका नकद जल गए। मिथुन ने बताया कि, “दोनों दरवाजे बाहर से बंद थे, इसलिए सभी ने दीवारें काटकर बाहर निकलने की कोशिश की।” उपजिला कार्यकारी अधिकारी (UNO) एस.एम. रहातुल इस्लाम और सहायक आयुक्त (भूमि) ओंगचिंग मारमा ने नुकसान का जायजा लिया और मदद का भरोसा दिया। पीड़ित परिवारों को 25 किलो चावल, 5,000 टका नकद और कंबल दिए गए। पुलिस आरोपियों की पहचान में जुटी है। मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पिछले हफ्ते 7 साल की बच्ची को जिंदा जलाया बांग्लादेश के लक्ष्मीपुर सदर में 19 दिसंबर की देर रात कुछ उपद्रवियों ने एक घर को बाहर से बंद कर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग में जिंदा जलने से एक 7 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए। यह घर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता बिलाल हुसैन का था। पुलिस के मुताबिक घटना रात करीब 1 बजे हुई। आग लगने से बिलाल की 7 साल की बेटी आयशा अख्तर की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं बिलाल हुसैन और उनकी दो अन्य बेटियां सलमा अख्तर (16) और सामिया अख्तर (14) गंभीर रूप से झुलस गईं। बिलाल का इलाज लक्ष्मीपुर सदर अस्पताल में हुआ, जबकि दोनों बेटियों को गंभीर हालत में ढाका भेजा गया। हिंदू युवक को पीट-पीटकर मारा, फिर जलाया पिछले हफ्ते 18 दिसंबर को ढाका के पास भालुका में हिंदू युवक दीपू चंद्र की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाया था। वो यहीं के कपड़ा कारखाने में काम करते थे। दावा था कि उसने फेसबुक पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की थी, लेकिन जांच में ऐसी किसी टिप्पणी के सबूत नहीं मिले। बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन के कंपनी कमांडर मोहम्मद शम्सुज्जमान ने बांग्लादेशी अखबार ‘द डेली स्टार’ को बताया था कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह कहा जा सके कि दास ने फेसबुक पर कुछ ऐसा लिखा था, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती थीं। दीपू के हत्या के मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। शम्सुज्जमान ने बताया कि स्थानीय लोगों और कपड़ा कारखाने में दास के साथ काम करने वालों से भी ईशनिंदा करने से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली है। ———————————— भास्कर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भास्कर इंटरव्यू- बांग्लादेश में दीपू चंद्र की हत्या प्लानिंग के साथ हुई:भाई बोला– यहां हर रोज हिंदुओं को मारा जा रहा, ईश निंदा के आरोप गलत बांग्लादेश में 18 दिसंबर की रात हिंदू युवक दीपू चंद्र दास (25) की हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि उसने इस्लाम का अपमान किया था। अब भारत में दीपू की हत्या में विरोध में जमकर प्रदर्शन हो रहा है। मंगलवार सुबह हिंदू संगठन विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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