केरल के मल्लपुरम जिले का मात्र 37 हजार की आबादी वाला छोटा सा कस्बा तिरुनावाया। वैसे तो यह जगह राज्य के प्राचीन भगवान नवमुकुंद (विष्णु) मंदिर और यहां हर 12 साल में होने वाले मामांकम उत्सव के लिए विख्यात है, लेकिन इस बार यहां 18 जनवरी से ‘दक्षिण भारत का पहला कुम्भ’ होने जा रहा है। यह दक्षिण की गंगा कही जाने वाली नीला नदी (भरतपुझा) के तट पर 3 फरवरी तक चलेगा। यह महामाघ उत्सव का बड़ा रूप है। जूना अखाड़ा, केरल की भारतीय धर्म प्रचार सभा इसके आयोजक हैं। राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में हिंदुओं का इतना बड़ा जमावड़ा दक्षिण भारत में चर्चा का विषय बन गया है। मैं इस वक्त नवमुकुंद मंदिर के ठीक बाहर हूं और यहां से आप 6 किमी के दायरे में कहीं भी चले जाएं, हर घर फूलों से सजा है। घरों, दुकानों पर जो पोस्टर लगे हैं, उन पर लिखा है- दक्षिण भारत का पहला कुम्भ। हालांकि बजट कम है, इसलिए यहां प्रयागराज कुम्भ जैसी टेंट सिटी नहीं बनी है। लोगों ने अतिथियों के लिए अपने घर केरल का यह उत्सव भव्य है। इसे मेरी शुभकामनाएं हैं। देशभर से लोग वहां पहुंच रहे हैं अवधेशानंदगिरी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा खोल दिए हैं। तिरुर के मधुसूरन एस कहते हैं कि अब तक उत्तर भारत के कुम्भ में हम मेहमान बनकर जाते थे, अब अतिथि देवो भवः की परंपरा हम निभाएंगे। मंदिर के 6 किमी के दायरे में 1500 घर इसके लिए तैयार किए गए हैं। तिरुनावाया के गोपीनाथ चेन्नर कहते हैं- मैंने घर की ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर अतिथियों का अरेंजमेंट किया है। स्वागत के लिए रोज रंगोली बना रहे हैं। सबसे बड़ी बात है कि अपने पहले कुम्भ के लिए स्थानीय लोग राज्य सरकार से मदद न मांगकर खुद खर्च उठा रहे हैं। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर आनंद वनम भारती ने बताया कि तिरुनावाया में महामाघ उत्सव की परंपरा 259 साल से बंद थी। हमने इसे कुम्भ के रूप में पुनर्जागृत किया है। जिस तरह से उत्तर में प्रयाग पितृ तर्पण और कुंभ का केंद्र है, वैसे ही दक्षिण में तिरुनावाया है। नीला नदी भी पौराणिक है। यह तमिलनाडु से शुरू होकर केरल में बहती है। 209 किमी लंबी यह केरल की दूसरी सबसे बड़ी नदी है। कुंभ के दौरान काशी से आए 12 ब्राह्मण रोज शाम को नीला की आरती करेंगे। हमारा अनुमान है इसमें 5 लाख से ज्यादा लोग आएंगे। जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, मां अमृतानंदमयी देवी, स्वामी चिदानंद पुरी, केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर भी शामिल होंगे। पेशवाई जैसी रथयात्रा,12 हजार भक्त अन्न प्रसादम की व्यवस्था में केरल सरकार पहले इस आयोजन में नहीं थी, लेकिन अब उसके देवासवम मंत्री वी.एन. वासवन कुम्भ के संरक्षक हैं। जिस तरह से उत्तर के कुम्भ की शुरुआत में पेशवाई निकलती है, ठीक वैसे ही इस कुम्भ में रथयात्रा निकलेगी। इसकी शुरुआत तमिलनाडु से होगी, जो 22 जनवरी को तिरुनावाया पहुंचेगी। 5 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर हैं। 12 हजार भक्त अन्न प्रसादम की व्यवस्था संभाल रहे हैं। पुष्कर के बाद ब्रह्मा जी का दूसरा मंदिर, आज पहला स्नान मंदिर के मुख्य पुजारी वासुदेव नंबूदिरी ने बताया कि मंदिर का आखिरी बार जीर्णोद्धार 1300 साल पहले हुआ था, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध है। राजस्थान के पुष्कर के बाद ब्रह्मा जी का दूसरा मंदिर यहीं है। 18 जनवरी को माघी अमावस्या पर कुंभ का पहला स्नान होगा। नदी तट पर दोनों ओर 2 किमी में घाट बने हैं। स्नान सिर्फ दिन में होंगे। रात में नहीं। कुम्भ और राजनीतिः केरल में 55% हिंदू वोट, सियासत इन्हीं के इर्द-गिर्द घूम रही केरल में कुम्भ के रूप में प्रचारित हो रहा यह उत्सव धार्मिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है। यहां आबादी करीब 3.50 करोड़ है। इसमें हिंदू वोटर 1.8 करोड़ से ज्यादा हैं। इस वक्त राज्य की वाम सरकार (एलडीएफ), कांग्रेस नीत मुख्य विपक्षी यूडीएफ और भाजपा तीनों का फोकस हिंदुओं पर है, क्योंकि यही वोटर सभी का खेल बना और बिगाड़ रहे हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में एलडीएफ को कुल 45% वोट मिले थे, इनमें सबसे ज्यादा वोट एझावा और दलित वर्ग के थे। यूडीएफ को 38% वोट मिले थे। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा नायर और ओबीसी वोटर्स का था। तीसरे नंबर पर भाजपा थी, जिसे 12% वोट मिले थे। इनमें ब्राह्मण, नायर, एझावा तीनों का लगभग बराबर वोट था। 2024 के लोकसभा चुनाव में आंकड़े बदले। एलडीएफ का वोट 33.6% रह गया तो यूडीएफ का बढ़कर 45% और भाजपा-एनडीए का 19.4% हो गया था। इसलिए हिंदू वोटर ही अब सियासत के केंद्र में हैं। राज्य सरकार पिछले साल सितंबर में अंतरराष्ट्रीय अयप्पा सम्मेलन कर चुकी है। वहीं, इस साल नगरीय निकाय चुनाव में तिरुवनंतपुरम में भाजपा की जीत और लगातार बढ़े वोट वोट प्रतिशत के बाद पार्टी में काफी उत्साह है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… केरल का प्रसिद्ध अट्टुकल पोंगाला महोत्सव:150 महिलाओं ने मिलकर बनाई खीर, देवी को किया अर्पण तिरुवनंतपुरम के अटुकल मंदिर में आयोजित अट्टुकल पोंगाला महोत्सव का आयोजन भेल स्थित अय्यप्पा मंदिर में किया गया। समिति सदस्य निदिश नायर ने बताया कि 150 महिलाओं ने ईंट के चूल्हों पर खीर बनाई। श्रद्धालु महिलाओं ने एक साथ देवी की आराधना की और पायसम अर्पित किया। पूरी खबर पढ़ें…
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