देश में इस साल सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को यह जानकारी दी। IMD के मुताबिक, 2026 में मानसून सीजन में देश में करीब 80 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है। 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। IMD ने पिछले आठ साल में पहली बार मानसून के सामान्य से कम रहने की बात कही है। लद्दाख, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के मध्य हिस्सों, दक्षिण ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा ने कहा कि इस साल देश में कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का करीब 92% रहने का अनुमान है। यह 2018 के बाद सबसे कम है। 2018 में सामान्य के मुकाबले 91% बारिश हुई थी। अल नीनो से मानसून में हल्की देरी संभव मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून के आसपास अल नीनो की स्थिति बन सकती है। यह आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करता है, जिससे बारिश में कमी और ब्रेक की स्थिति बन सकती है। 1951 के बाद से अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है। इनमें से 10 बार देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई, जबकि 6 मौकों पर यह पैटर्न अलग रहा। सीजन के आखिर (सितंबर) में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के पॉजिटिव फेज में आने की संभावना है। यह स्थिति आमतौर पर बारिश को बढ़ाती है, जिससे अल नीनो के असर की कुछ भरपाई हो सकती है। अल नीनो और ला नीना क्लाइमेट (जलवायु) के दो पैटर्न होते हैं- अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है। ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है। पिछले साल 8 दिन पहले आया था मानसून पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। अल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है। IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरल पहुंचा था। आम आदमी के लिए 9 बड़ी बातें… ——— ये खबर भी पढ़ें… इस साल मानसून में 6% कम बारिश का अनुमान:स्काईमेट ने कहा- MP, राजस्थान और पंजाब-हरियाणा में सामान्य से कम बारिश हो सकती है इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रह सकती है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है। जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिलीमीटर है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रहेगी। एजेंसी ने 94% बारिश का अनुमान दिया है। पूरी खबर पढ़ें…
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