राज्यों की विधानसभाओं में तेजी से बिल पास करने का चलन बढ़ा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 30% विधेयक उसी दिन पारित कर दिए गए, जिस दिन उन्हें सदन में पेश किया गया। औसतन विधानसभाएं सिर्फ 24 दिन चलीं। बजट पर औसतन 8 दिन चर्चा 2025 में विधानसभाओं में बजट पर औसतन 8 दिन चर्चा हुई। तमिलनाडु में बजट पर 27 दिन बहस चली। पंजाब ने बजट चर्चा सिर्फ 2 दिन में खत्म की। 1950 के दशक में 90-120 दिन चलती थी विधानसभा 1950 के दशक में भारत में राज्य विधानसभाओं का कामकाज काफी सक्रिय और लंबा होता था। उस दौर में देश की विधानसभाएं साल में औसतन 60 से 70 दिन तक चलती थीं। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मद्रास (अब तमिलनाडु) जैसे बड़े राज्यों की विधानसभाओं की बैठकें साल में 90 से 120 दिन से भी अधिक समय के लिए बुलाई जाती थीं। ———————————————– पूरी खबर पढ़ें… वन नेशन, वन इलेक्शन पर सुरक्षित रास्ता तलाश रही सरकार: दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव; पहले 20 राज्यों के चुनाव एक साथ करने पर विचार केंद्र सरकार वन नेशन वन इलेक्शन के लिए सुरक्षित रास्ता तलाश रही है। इसके लिए बनी जेपीसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक समिति ‘टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल’ पर विचार कर रही है, जिससे राज्यों में बार-बार चुनाव कराने या विधानसभाओं के कार्यकाल में बहुत बड़ी कटौती करने की जरूरत न पड़े। पूरी खबर…
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