दिग्गजों को जिलाध्यक्ष बनाने पर कांग्रेस प्रभारी का जवाब:हरीश चौधरी बोले- जिन युद्धों में काबिल लोग लडे़, वहां सेना सफल हुई

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के जरिए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पर नेताओं की नाराजगी थम नहीं रही है। हफ्तेभर पहले पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी पर गुटबाजी को लेकर निशाना साधा था। कमलेश्वर ने कहा था प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी का काम पार्टी बनाना है पार्टी बनना नहीं। कमलेश्वर के इस बयान को प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने सही ठहराया है। कांग्रेस के अभियान और जिलाध्यक्षों की संभागवार बैठकों को लेकर दैनिक भास्कर ने उनसे बातचीत की। उन्होंने कहा कि युद्धों को देखें तो बड़े पदों पर रहने वाले काबिल लोगों ने आगे आकर मोर्चों पर लड़ाई लड़ी और युद्ध में वो सेना सफल हुई। तो इन लोगों की सहमति से पार्टी नेतृत्व ने फैसले किए। पढ़िए… सवाल: आप जिलाध्यक्षों से किन मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं?
हरीश चौधरी: संगठन सृजन अभियान के माध्यम से चयनित जिला अध्यक्षों से हम लोगों का निरंतर संवाद रहता है। उसी क्रम में हम संभागवार जिलाध्यक्षों से संवाद कर रहे हैं। भविष्य में संगठन को मजबूत करने और मप्र को कैसे मजबूत करें उसको लेकर ये बैठकें हो रही हैं। सवाल: जिले की कार्यकारिणी को लेकर क्या रोडमैप है?
हरीश चौधरी: सिर्फ जिला अध्यक्ष की नियुक्ति संगठन सृजन नहीं है। हर स्तर पर संगठन सृजन करना है। जिला कार्यकारिणी होगी, ब्लॉक, मंडलम और ग्राम पंचायत स्तर की कार्यकारिणी होगी। हर लेवल पर संगठन सृजन कर रहे हैं। सवाल: जिले से लेकर बूथ स्तर पर कब तक टीम बन जाएगी?
हरीश चौधरी: कोई समय-सीमा हम लोगों ने तय नहीं की है। संगठन सृजन का मूल माध्यम एक प्रक्रिया के तहत है। पहले हमारे संगठन में हम प्रभारी और कुछ लोग मिलकर नियुक्ति करते थे। बदलाव संगठन सृजन में आया है। जैसे जिलाध्यक्ष के संदर्भ में कई माध्यम थे। उनमें से एक माध्यम ऑब्जर्वर्स की चर्चा होती है। ऑब्जर्वर्स के माध्यम से हम लोगों ने एक्सरसाइज की और उसके अलावा और कई माध्यम थे जिनसे हमने ये फैसला किया। सवाल: कई लोग नाराज हैं। कमलेश्वर पटेल ने कहा कि प्रदेश प्रभारी का काम पार्टी बनाना है, पार्टी बनना नहीं?
हरीश चौधरी: कमलेश्वर जी, सीडब्ल्यूसी के मेंबर हैं। उन्होंने जो सलाह दी वो सही सलाह है। हम हर स्तर पर सामंजस्य के लिए आए हैं। हमें सामंजस्य ही बनाना है। ये मूल सलाह चाहे मीडिया के माध्यम से किसी को देना हो या आंतरिक बैठकों में आए। यही हमारे संगठन का काम है। हमें सामंजस्य बनाना चाहिए और कांग्रेस में सबको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उनकी सही सलाह थी। सवाल: राज्य और राष्ट्रीय स्तर के बडे़ नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाने के पीछे क्या सोच है?
हरीश चौधरी: जो लड़ाई राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ी जा रही है जिसमें संविधान, लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं और देश को बचाना ये देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं। पिछले दिनों हमारी ये समझ बनी है कि हमें लड़ाई लोगों के बीच में लड़नी है। भारत जोड़ो यात्रा किस परिस्थिति में हुई जब सारे माध्यम बंद हो गए। जब लोकसभा में राहुल गांधी की आवाज संसद में बंद कर दी गई, कांग्रेस की आवाज, सांसदों की आवाज, मीडिया के माध्यम से आवाज और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से उठने वाली संपूर्ण आवाज जब बंद कर दी गई तो अंतिम लड़ाई थी राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से सड़क पर लोगों के बीच अपनी बात रखें। इस तरह की परिस्थितियां आ गई हैं कि जिले में अब हमें पूरी ताकत से काम करना है। इस सोच के अंतर्गत बड़े नेताओं को इस लड़ाई में शामिल किया गया। युद्धों को देखें तो बड़े पदों पर रहने वाले काबिल लोगों ने आगे आकर मोर्चों पर लड़ाई लड़ी और युद्ध में वो सेना सफल हुई। तो इन लोगों की सहमति से पार्टी नेतृत्व ने फैसले किए। सवाल: कई बार कहा जाता है कि जो जिला अध्यक्ष होंगे वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, ऐसा कोई फैसला हुआ है?
हरीश चौधरी: इस संदर्भ में कोई नीतिगत फैसला नहीं हुआ है। सवाल: मोदी जी ने देश को संबोधित करते हुए कहा है कि जीएसटी रिफॉर्म बचत का बड़ा अभियान है।
हरीश चौधरी: मोदी जी खुद गलती करते हैं। गलती पर जब विपक्ष के नाते राहुल गांधी ने जीएसटी के संदर्भ में बात की तो उनका मजाक उड़ाया गया। राष्ट्रीय हित में इतने सालों का नुकसान होने के बाद अब गलती सुधारी। सवाल: वोट चोरी वाले अभियान में मप्र में और क्या करने जा रहे हैं?
हरीश चौधरी: वोट चोरी के संदर्भ में इसकी पृष्ठभूमि देखिए। संविधान पर उस दिन सबसे बड़ा प्रहार किया गया जब चुनाव आयुक्त की नियुक्ति निष्पक्ष तौर पर तीन सदस्य प्रतिपक्ष के नेता, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस करते थे। उसको बदलकर चीफ जस्टिस की जगह मंत्रिमंडल का एक सदस्य का फैसला हुआ। वो निर्णय हमारे संविधान में लैटर इन स्पिरिट में लागू करने की व्यवस्था है। उस स्पिरिट भावना को खत्म करते हुए जब ये फैसला किया तो सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे गलत ठहराया। लेकिन, हमारी एक व्यवस्था है कि लोकसभा में बहुमत के आधार पर निर्णय करना। लोकसभा और राज्यसभा में उस पर चर्चा नहीं हुई। इस कारण वो फैसला और चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहा। जब आपका चयन निष्पक्ष नहीं था और उनसे गलत काम करवाने हैं तो इस मंशा से लोकसभा और राज्यसभा में कानून बदला गया कि उनके खिलाफ कानूनन कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। वोट चोरी के संदर्भ में इन्होंने जो कृत्य किए हैं वो बात हम आम लोगों तक पहुंचा रहे हैं। अब लोगों को निर्णय लेना है। आजादी के पहले भी ऐसी स्थिति थी कि पूरा तंत्र अंग्रेजों ने एकतरफा खत्म कर लिया था उसके बावजूद जब भारत की जनता को समझ आया तो उन्होंने व्यवस्था परिवर्तन किया। अब ये लड़ाई सिर्फ कांग्रेस या राहुल गांधी की नहीं ये लड़ाई देश, लोकतंत्र और संविधान बचाने की है। उस संदर्भ में हम वोट चोरी का अभियान चला रहे हैं। यह खबर भी पढ़ें…
कमलेश्वर बोले- प्रदेश प्रभारी का काम समन्वय बनाना, पार्टी बनना नहीं पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने मप्र में संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी पर कांग्रेस के ही प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी पर हमला बोला है।कमलेश्वर पटेल ने गुटबाजी को लेकर कहा- गुटबाजी और प्रतिस्पर्धा हमेशा रही है। यहां पढे़ं पूरी खबर…

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