मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना से जनजातीय अंचलों का हो रहा व्यापक उत्थान -राजस्थान का समावेशी विकास मॉडल जनजाति सशक्तीकरण की लिख रहा नई इबारत

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना के साथ कार्य करते हुए प्रदेश के जनजातीय अंचलों के उत्थान के लिए कृत संकल्पित है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘समावेशी और आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा इन क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए ठोस नीतियां और योजनाएं बनाकर इन्हें धरातल पर उतारा गया है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य का जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, जल प्रबंधन, रोजगार और संस्कृति संरक्षण के क्षेत्रों में समावेशी विकास के मूल मंत्र के साथ राज्य को तेजी से आगे बढ़ाने में लगा है। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की विचारधारा ‘अपनी भूमि, अपनी संस्कृति और अपने अधिकारों की रक्षा’ राज्य सरकार की नीतियों में साकार हो रही है। इस वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर राज्य सरकार प्रदेशभर में जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा (1 से 15 नवंबर तक) के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी कर रही है।

जनजाति क्षेत्रों के विकास के लिए टीएसपी फंड किया डेढ़ गुणा-

                राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के उत्थान के संकल्प को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए टीएसपी फंड को 1,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये किया है। साथ ही, सामुदायिक वनाधिकार क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित गोविंद गुरू जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना भी प्रारंभ की है, देवला-कोटड़ा (उदयपुर) और जसवंतपुरा (जालोर) में नए आवासीय विद्यालय तथा शाहबाद (बारां) में सहरिया जनजाति खेल अकादमी की स्थापना की जा रही है। जनजाति वर्ग के बच्चों के पोषण तथा उन्हें घर के नजदीक प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 250 नवीन मां-बाड़ी केंद्रों की स्थापना भी प्रक्रियाधीन है। मां-बाड़ी केन्द्रों में कार्यरत शिक्षाकर्मी, महिला सहयोगिनी तथा स्वास्थ्यकर्मी के मानदेय में वित्तीय वर्ष 2025-26 से 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

शिक्षा क्षेत्र हो रहा सुदृढ़, कौशल विकास से युवा बन रहे हुनरमंद-

                जनजाति क्षेत्र के युवाओं को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उनमें कौशल विकास के लिए राज्य सरकार कई कदम उठा रही है। यहां विभिन्न छात्रावासों और आवासीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। प्रदेश में संचालित 446 आश्रम छात्रावासों में लगभग 25 हजार से अधिक विद्यार्थी निःशुल्क आवास, भोजन और अध्ययन की सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं।

                वहीं, राज्य के 23 आवासीय विद्यालयों में 3,800 से अधिक विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, उदयपुर के ढीकली और डूंगरपुर के सूरपुर में स्थित मॉडल पब्लिक रेजिडेंशियल स्कूल शिक्षा में उत्कृष्टता के नए केंद्र बन चुके हैं। प्रदेश के 30 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों में भी लगभग 10 हजार विद्यार्थी आधुनिक शिक्षण पद्धति, डिजिटल लर्निंग और खेल सुविधाओं को प्राप्त करते हुए अध्ययनरत हैं। विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के तहत 8 बहुउद्देशीय छात्रावासों में 878 विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग व आवास सुविधा दी जा रही है।

                युवाओं में कौशल विकास कर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम, सीपेट जयपुर और आईडीटीआर रेलमगरा जैसे संस्थानों द्वारा जनजाति क्षेत्र के हजारों युवाओं को तकनीकी व व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अशोक लेलैंड प्रशिक्षण केंद्र, रेलमगरा में 25 युवाओं को भारी वाहन चालक का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है।

खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए उठाए गए कई कदम-

                राज्य के होनहार युवा शिक्षा के साथ ही खेलकूद के क्षेत्र में भी देश और विदेश में राजस्थान का नाम रोशन कर रहे हैं। खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए संचालित 13 खेल अकादमियों में 895 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार ने खिलाड़ियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए खेल छात्रावासों में मैस भत्ता बढ़ाकर 4,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशिक्षकों की नियुक्ति, उपकरण आपूर्ति और प्रतियोगिताओं के आयोजन को प्राथमिकता दी जा रही है। यही नहीं, राज्य स्तर पर आयोजित एकलव्य विद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिता में प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिनमें से चार ने राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त कर राजस्थान का मान बढ़ाया।

जल संरक्षण में जनसहभागिता से बदल रही तस्वीर-

                जनजातीय अंचलों में जलोत्थान योजनाएं, एनिकट निर्माण, नहर सुदृढ़ीकरण और जल संरचना पुनरोद्धार कार्य जल सुरक्षा की दिशा में मिसाल बने हैं। जनजाति भागीदारी योजना के तहत विद्यालय, सड़क, पेयजल और सामुदायिक भवन निर्माण में न्यूनतम 30 प्रतिशत जनसहयोग से कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का मानना है कि ‘सच्चा विकास वही है, जिसमें समाज भी भागीदार बने।’ यही दृष्टिकोण इन योजनाओं में झलकता है।

जनजाति नायकों के गौरव की पुनःस्थापना-

                राज्य सरकार प्राचीन विरासत और संस्कृति का संरक्षण करने के साथ ही जनजाति नायकों के गौरव की पुनःस्थापना का कार्य भी कर रही हैै। डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर में जनजाति नायकों के स्मारक और वीर बालिका काली बाई संग्रहालय के निर्माण हेतु 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। सीताबाड़ी, कमलनाथ महादेव और जावर माता मंदिर जैसे आस्था स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार की पीएम जनमन योजना के तहत बारां जिले में 17 मल्टीपरपज केंद्रों में से 8 का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष का कार्य प्रगति पर है। ‘स्वच्छ परियोजना’ के अंतर्गत 4,560 स्वास्थ्यकर्मी टीबी मुक्त भारत मिशन और सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण में सक्रिय हैं।

नवाचारों के माध्यम से सुनिश्चित हो रहा सर्वांगीण विकास-

                जनजाति क्षेत्रों में विभिन्न नवाचारों के माध्यम से सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। केन्द्र और राज्य सरकार व इसरो के संयुक्त तत्वावधान में ‘जयकार प्रोग्राम’ के तहत उदयपुर के ईएमआरएस विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान प्रशिक्षण प्राप्त किया। माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान में ‘बनफूल डिज़ाइन स्टूडियो’ की स्थापना जनजातीय कला संरक्षण और विपणन में नई राह दिखा रही है। ‘प्रोजेक्ट चितेरा’ के माध्यम से छात्रावासों और विद्यालयों में मांडना व पारंपरिक चित्रकला को पुनर्जीवित किया गया है। एम्स, जोधपुर के सहयोग से आबूरोड (सिरोही) में सैटेलाइट सेंटर फॉर ट्राइबल हेल्थ एंड रिसर्च की स्थापना हुई है, जहां प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 अक्टूबर, 2024 को ड्रोन दवा आपूर्ति सुविधा का शुभारंभ किया गया।

‘अमृत कलश योजना’ बनी सामुदायिक भागीदारी की नई पहल-

                सीएसआर और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी से विभाग ने ‘अमृत कलश योजना’ प्रारंभ की है। इस अंतर्गत विद्यार्थियों को आईआईएम उदयपुर, आईआईटी जोधपुर, एनएलयू और केवीके जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का भ्रमण करवाया गया। मैजिक बस इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से 25 जिलों के 43 विद्यालयों व 450 छात्रावासों में जीवन-कौशल प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ है। ‘माई मिशन’ कार्यक्रम के तहत 40 विद्यार्थियों को राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा  की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग दी जा रही है। आरएसएमएम लिमिटेड के सीएसआर सहयोग से जनजाति खिलाड़ियों की लैक्रॉस टीम इंडिया ने उज्बेकिस्तान में एशियाई प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। तृतीय राष्ट्रीय लैक्रॉस चैम्पियनशिप 2025-26 में राज्य के 55 प्रतिभाशाली जनजाति खिलाड़ियों ने 6 वर्गाें में 5 स्वर्ण एवं 1 कास्य पदक जीता। यूएनएफपीए की साझेदारी में ‘संचार सेतु’ वर्चुअल लर्निंग प्लेटफॉर्म प्रारंभ हुआ है। ‘एक वृक्ष, प्रति वर्ष’ और ‘हमारा कक्ष-हमारा वृक्ष’ अभियानों से पर्यावरण संरक्षण की भावना को बल मिला है।

विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया जा रहा सम्मानित-

                जनजाति क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को विभिन्न स्तर पर सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। 4 अक्टूबर, 2024 को आदि-गौरव सम्मान समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 17 व्यक्तियों व संस्थाओं को शिक्षा, कला, खेल एवं समाजसेवा में उत्कृष्ट योगदान हेतु सम्मानित किया। 15 नवम्बर, 2024 को बांसवाड़ा में आयोजित बिरसा मुंडा 150वीं जयंती समारोह में ‘नवादि-युगधारा प्रणेता समागम’ विषय के अंतर्गत 27 जनजाति नायकों को सम्मानित किया गया, जो जनजाति समाज की नई चेतना का प्रतीक है।

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