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CBSE का बड़ा फैसला…. 12वीं के लिए OSM सिस्टम लागू… ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ से होगा ये फायदा

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🎯10वीं की जांच पहले की तरह भौतिक रूप में रहेगी

🎯टोटलिंग की गलतियां रुकेंगी और पारदर्शिता बढ़ेगी
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 12वीं कक्षा के लिए ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम लागू करने की घोषणा की है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में सीबीएसई ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब 12वीं के छात्रों की मेहनत का मूल्यांकन शिक्षक भौतिक रूप से नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर डिजिटल माध्यम से करेंगे।

आगामी सत्र से प्रभावी होने वाली इस डिजिटल जांच प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी, सटीक और तीव्र बनाना है।

कक्षा 10वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन फिलहाल पारंपरिक भौतिक तरीके से ही जारी रहेगा। इस बदलाव से शिक्षकों की कार्यशैली और छात्रों के उत्तर लिखने के तरीके पर भी बड़ा प्रभाव पड़ेगा।शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में सीबीएसई ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब 12वीं के छात्रों की मेहनत का मूल्यांकन शिक्षक भौतिक रूप से नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर डिजिटल माध्यम से करेंगे।

ऑन स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) से मानवीय भूलों, विशेषकर अंकों को जोड़ने (टोटलिंग) की गलतियों की संभावना शून्य हो जाएगी। लॉगिन और लॉगआउट का समय स्वतः दर्ज होने से मूल्यांकन प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।

इससे न केवल परिणाम तैयार करने की गति बढ़ेगी, बल्कि कॉपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने-ले जाने में होने वाले जोखिम और समय की बर्बादी भी कम होगी। बोर्ड का मानना है कि इस व्यवस्था से व्यक्तिगत पक्षपात की संभावना भी न्यूनतम हो जाएगी।

डिजिटल मूल्यांकन को सुगम बनाने के लिए उत्तर पुस्तिका के स्ट्रक्चर में भी बदलाव किए गए हैं। विशेषकर विज्ञान संकाय (Science Stream) की कापियों को अब भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के अलग-अलग सेक्शन में विभाजित किया गया है।

छात्रों के लिए अब यह अनिवार्य होगा कि वे संबंधित विषय का उत्तर उसी के लिए निर्धारित सेक्शन में लिखें। यदि कोई छात्र गलत सेक्शन में उत्तर लिखता है, तो उसे जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि डिजिटल जांच के दौरान परीक्षक को उत्तर ढूंढने में कोई तकनीकी समस्या न हो।

शुरुआत में शिक्षकों को कुछ कठिनाइयां आ सकती हैं। धुंधली इमेज, सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन में त्रुटि या इनपुट डिवाइसेस की खराबी जैसी तकनीकी बाधाएं चुनौती पेश कर सकती हैं।

इन समस्याओं से निपटने के लिए सीबीएसई ने शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सहायता टीम की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है, ताकि नई प्रणाली को बिना किसी बाधा के लागू किया जा सके।

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