हिमाचल प्रदेश में इन दोनों एक अनोखा ट्रेंड सामने आ रहा है। खासकर ऊपरी शिमला में इन दिनों एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। शौक और स्टेटस सिंबल के तौर पर लोग सोने की चेन में तेंदुए के नाखून लगवाकर पहन रहे हैं। वन विभाग को आशंका है कि इस तरह की ज्वेलरी बाहरी राज्यों से अवैध रूप से तस्करी कर लाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में युवाओं और शौकीन लोगों के बीच तेंदुए के नाखून को ‘लकी चार्म’ और प्रभावशाली पहचान के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर ऐसी ज्वेलरी खुलेआम उपलब्ध नहीं है, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि इसे गुप्त रूप से मंगवाया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है। इसके किसी भी अंग चाहे वह नाखून हो, दांत या खाल का रखना, खरीदना या बेचना पूर्णतः अवैध है और ऐसा करते पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना और कारावास दोनों हो सकते हैं। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें इस तरह की गतिविधियों की सूचना मिली है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि फैशन या अंधविश्वास के चलते वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल न हों। ऐसे हुआ खुलासा बीते दिनों रोहड़ू बाजार में वन विभाग की छह टीमों ने एकसाथ दबिश देकर तेंदुए के 86 नाखूनों, पांच दांतों और दुर्लभ पक्षियों के पंख के साथ छह ज्वेलर गिरफ्तार किए थे। वन विभाग और पुलिस को शक है कि सीमावर्ती क्षेत्रों से इन अवशेषों की तस्करी की गई है। वन विभाग और पुलिस को शक है कि सीमावर्ती क्षेत्रों से इन अवशेषों की तस्करी की गई है। पांच ज्वेलर्स को तो इसमें जमानत मिल गई है, जबकि एक को कोर्ट ने जमानत नहीं दी है। यह कानूनन अपराध, अवैध गतिविधियों से दूर रहें लोग वन विभाग के डीएफओ रवि शंकर शर्मा ने कहा कि तेंदुए के नाखून या किसी भी अन्य वन्यजीव अंग की खरीद-फरोख्त पूरी तरह अवैध है और यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दंडनीय अपराध है। कोई व्यक्ति तेंदुए के नाखून को सोने की चेन या अन्य आभूषण में लगाकर पहनता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होती है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के अंगों को फैशन या अंधविश्वास के नाम पर इस्तेमाल करना गंभीर अपराध है। तेंदुआ एक संरक्षित प्रजाति है और उसके किसी भी अंग का रखना, बेचना या खरीदना कानूनन प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है। लोगों को इस प्रकार की अवैध गतिविधियों से दूर रहना चाहिए और यदि कहीं ऐसी खरीद-फरोख्त की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग को सूचित करना चाहिए। लोगों में खुद को ताकतवर समझने की गलतफहमी वाइल्ड लाइफ पर रिसर्च करने वाले पवन कुमार का कहना है कि तेंदुए को ताकतवर और फुर्तीला शिकारी माना जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि उसका नाखून पहनने से साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। कई लोग इसे बुरी नजर या नकारात्मक शक्तियों से बचाने वाला ताबीज समझते हैं। कुछ समुदायों में इसे प्रभाव, दबदबा या रुतबे का प्रतीक माना जाता है। कुछ स्थानों पर इसे तांत्रिक या धार्मिक विश्वासों से भी जोड़ा जाता है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हैं। लोगों को पता ही नहीं है कि ये गले में पहनना कानूनी अपराध है।
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