मध्यप्रदेश में अगले 3 दिन हल्की बारिश होने की संभावना है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश का दौर रहेगा, लेकिन 25-26 सितंबर से प्रदेश में तेज बारिश हो सकती है। इसके बाद मानसून की वापसी होने लगेगी। आज सोमवार को भोपाल में सुबह से धूप निकली है। इससे पहले रविवार को भोपाल के कोलार डैम, कलियासोत और भदभदा डैम के गेट खुले रहे। वहीं, नर्मदापुरम, उज्जैन, मंडला, नरसिंहपुर समेत 15 से अधिक जिलों में हल्की बारिश हुई। उज्जैन में दिनभर उमस और धूप के कारण तेज गर्मी से परेशान लोगों को शाम को तेज बारिश से राहत मिली। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि रविवार को प्रदेश में बारिश का कोई भी सिस्टम एक्टिव नहीं रहा। हालांकि, कई बार लोकल सिस्टम की वजह से बारिश होने लगती है। उन्होंने कहा- सोमवार-मंगलवार को भी हल्की बारिश होने की संभावना है। 25 सितंबर से लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) एक्टिव होने से तेज बारिश का सिलसिला शुरू होगा। अब तक 118 प्रतिशत बारिश हो चुकी
मध्यप्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 43.8 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 36.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.5 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। अब तक 118 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। इंदौर संभाग की तस्वीर सुधरने लगी
इस मानसूनी सीजन में शुरुआत से ही इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं रही। एक समय तो इंदौर में प्रदेश की सबसे कम बारिश की स्थिति थी। ऐसे में अटकलें थीं कि क्या इस बार इंदौर में सामान्य बारिश भी होगी? लेकिन सितंबर महीने में तेज बारिश की वजह से इंदौर में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया। हालांकि, संभाग के बड़वानी, खरगोन और खंडवा की तस्वीर बेहतर नहीं है। दूसरी ओर, उज्जैन में अब भी कोटा पूरा नहीं हुआ है। सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर दूसरे नंबर पर है। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर
एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। अच्छी बारिश वाले 39 जिलों में भोपाल संभाग के 4, इंदौर में 5, जबलपुर के 7, ग्वालियर के 5, सागर के 6, उज्जैन के 4, चंबल के सभी 3, शहडोल के 3 और नर्मदापुरम संभाग के 2 जिले शामिल हैं। एमपी में अब तक इतनी बारिश… गुना में सबसे ज्यादा, खरगोन में सबसे कम बारिश
इस बार गुना में सबसे ज्यादा 65.4 इंच पानी गिर चुका है। रायसेन में 61 इंच, मंडला में 60 इंच, श्योपुर में 56.6 इंच और अशोकनगर में 56 इंच बारिश हो चुकी है। वहीं, सबसे कम 26.6 इंच बारिश खरगोन में हुई। शाजापुर में 28.4 इंच, खंडवा में 28.6 इंच, बड़वानी में 29.7 इंच और धार में 31.5 इंच पानी गिर चुका है। अगले 2 दिन ऐसा रहेगा मौसम… जानिए, 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड… भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश
भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 4 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इंदौर में सितंबर में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश
इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड साल 1954 में बना था। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिर चुका है। इस महीने इंदौर में औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या इससे अधिक दिन तक बारिश हो सकती है। ग्वालियर में वर्ष 1990 में गिरा था 25 इंच पानी
ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी साढ़े 25 इंच बारिश हुई थी। यह सितंबर में मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में साढ़े 12 इंच बारिश हुई थी। सितंबर में ग्वालियर की औसत बारिश करीब 6 इंच है, लेकिन पिछले तीन साल से इससे अधिक बारिश हो रही है। ग्वालियर में इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। ऐसे में सितंबर में जितनी भी बारिश होगी, वह बोनस की तरह ही रहेगी। जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड
सितंबर महीने में जबलपुर में भी मानसून जमकर बरसता है। 20 सितंबर 1926 को जबलपुर में 24 घंटे के अंदर साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। वहीं, पूरे महीने में 32 इंच बारिश साल 1926 को हो चुकी है। यहां महीने में औसत 10 दिन बारिश होती है। वहीं, सामान्य बारिश साढ़े 8 इंच है। पिछले 3 साल से सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है। उज्जैन में 1981 में पूरे मानसून का कोटा हो गया था फुल
उज्जैन की सामान्य बारिश 34.81 इंच है, लेकिन वर्ष 1961 में सितंबर की बारिश ने ही पूरे सीजन की बारिश का कोटा फुल कर दिया था। इस महीने 1089 मिमी यानी करीब 43 इंच पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक साढ़े 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 सितंबर 1961 को बना था। सितंबर महीने में उज्जैन की सामान्य बारिश पौने 7 इंच है, लेकिन पिछले दो साल से 12 इंच से ज्यादा बारिश हो रही है। इस महीने औसत 7 दिन बारिश होती है। ये खबर भी पढ़ें… मंडे मानसून अपडेट-इंदौर का भी कोटा पूरा, उज्जैन पीछे एमपी के भोपाल, ग्वालियर समेत मध्यप्रदेश के 39 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो चुका है जबकि 9 जिलों में 90 प्रतिशत या इससे अधिक पानी गिरा है। प्रदेश में सामान्य बारिश 37 इंच के मुकाबले 43.8 इंच बारिश हो चुकी है। यह कोटे से 18 प्रतिशत अधिक है। अब तक पीछे रहे इंदौर का कोटा भी पूरा हो चुका है, लेकिन उज्जैन अब भी पीछे है। पढे़ं पूरी खबर…
MP में अगले तीन दिन हल्की बारिश:25-26 सितंबर से तेज पानी गिरेगा; भोपाल में कोलार, कलियासोत और भदभदा डैम के गेट खुले
